मप्र सरकार की अपील पर इंदौर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का अहम फैसला, सिंगल बेंच का आदेश पलटा
इंदौर। मप्र हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि अतिरिक्त पेंशन का लाभ 80 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही देय होगा, न कि 80वें वर्ष में प्रवेश करते ही। इस फैसले के साथ ही जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस हिमांशु जोशी की डिवीज़न बेंच ने राज्य सरकार द्वारा दायर सभी 7 रिट अपीलों को स्वीकार करते हुए सिंगल जज द्वारा पारित आदेशों को निरस्त कर दिया गया।
यह अपीलें राज्य शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग के सचिव व अन्य द्वारा सिंगल बेंच के 25 नवंबर 2024 को पारित उन आदेशों के खिलाफ दायर की गई थीं, जिनमें सिंगल बेंच ने 80 वर्ष की आयु में प्रवेश करते ही 20% अतिरिक्त पेंशन देने का निर्देश दिया था। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह व्याख्या वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 03.08.2009 की भाषा और प्रशासनिक मंशा के विपरीत है।
क्या था पूरा मामला
राज्य सरकार ने वर्ष 2009 में एक कल्याणकारी योजना लागू की थी, जिसके तहत 80 वर्ष, 85 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को अतिरिक्त पेंशन देने का प्रावधान किया गया।
लेकिन विवाद इस बात को लेकर था कि यह लाभ 80वें जन्मदिन से मिलेगा या 80 वर्ष पूरे होने के बाद।
पेंशनरों का कहना था कि व्यक्ति 80वें जन्मदिन पर 80वें वर्ष में प्रवेश करता है, इसलिए उसी दिन से अतिरिक्त पेंशन मिलनी चाहिए। वहीं राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने तर्क दिया कि जब तक 80 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं होती, तब तक अतिरिक्त पेंशन देय नहीं है।
डिवीजन बेंच की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि यदि पेंशनरों की दलील स्वीकार कर ली जाए, तो उसी तर्क के आधार पर सरकारी कर्मचारियों को 60 वर्ष पूरे होने से पहले ही सेवानिवृत्त मानना पड़ेगा, जो कानूनन असंभव है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि—
“अतिरिक्त पेंशन एक विशेष लाभ है, जो निर्धारित आयु पूर्ण होने के बाद ही दिया जा सकता है, उससे पहले नहीं।”
सिंगल बेंच का आदेश रद्द
डिवीजन बेंच ने माना कि सिंगल जज द्वारा अतिरिक्त पेंशन 80वें वर्ष में प्रवेश मात्र पर देना, कानूनन सही नहीं है।
परिणामस्वरूप राज्य सरकार की सभी 7 रिट अपीलें स्वीकार करके रिट याचिकाओं पर सिंगल बेंच के आदेशों को निरस्त कर दिया गया।
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